What is Wired and Wireless Transmission in Hindi :-
हेलो दोस्तों मै गौरव पाठक एकबार फिर से Hindi Jankari में आप सभी लोगो का स्वागत करता हूँ। आज के लेख में आप सभी लोगो को वायर्ड और वायरलेस ट्रांसमिशन के बारे में बताने जा रहा हूँ।
वायर्ड ट्रांसमिशन क्या है :-
वायर्ड को गाइडेड भी कहते है, वायर्ड ट्रांसमिशन में प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच सूचना या प्रेषण किसी भौतिक तार(Physical Wire) या केबल(Cable) के माध्यम से होता है, दूसरे शब्दों में, प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक भेजे जाने वाले सिग्नल किसी तार या केबल से होकर ट्रवेल करते है। यह तार या केबल किसी भी प्रकार का हो सकता है, जैसे- Twisted Pair Cable, Baseband Coaxial Cable, Broadband Coaxial Cable, Fiber Optic Cable इन सभी भौतिक माध्यमों के अपने गुण-दोष होते है।
वायर्ड ट्रांसमिशन का उपयोग ऐसे ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है, जहां प्रेषक(Sender) और प्राप्तकर्ता(Receiver) दोनों ही एक निश्चित स्थान पर स्थिर हो, ऐसी स्थिति में उनके बीच भौतिक तार या केबल डाल दिया जाता है, जिसका उपयोग दोनों ओर से कभी भी किया जा सकता है, इस प्रकार के ट्रांसमिशन में प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच की दूरी कुछ मीटर से लेकर हजारो किलोमीटर तक हो सकती है। यदि भौतिक दूरी कम है,तो उनके बीच ट्रांसमिशन के लिए विशेष तार या केबल डाले जा सकते है, यदि दूरी बहुत अधिक है, तो ट्रांसमिशन के लिए पहले से उपलब्ध तारो जैसे-टेलीफ़ोन लाइनो का भी उपयोग किया जा सकता है, यह भी आवश्यक नहीं है, की प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच का ट्रांसमिशन माध्यम सारा एक ही तरह का हो। जरुरत के अनुसार यह कई भागो में बंटा हुआ हो सकता है, और हर भाग अलग तरह का हो सकता है, लेकिन यह आवश्यक है,कि उनको किसी भी प्रकार आपस में जोड़कर एक लगातार माध्यम का रूप दिया जाये, ताकि भेजा जाने वाला डाटा बिना किसी बाधा के प्राप्तकर्ता तक पहुंच जाये, इसके लिए कुछ अन्य उपकरणों जैसे- मोड़ेम्स का प्रयोग भी आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है।
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वायरलेस ट्रांसमिशन :-
वायरलेस को unguided भी कहते है, इसप्रकार के ट्रांसमिशन में प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक कोई सूचना भेजने के लिए किसी भौतिक माध्यम का प्रयोग नहीं किया जाता है, बल्कि आकाश का उपयोग किया जाता है, ऐसा करना तब आवश्यक हो जाता है। जब प्रेषक(Sender) अथवा प्राप्तकर्ता(Receiver) अथवा दोनों स्थिर न हो अर्थात चलायमान(mobile) हो, मोबाइल होने के कारण उनका कोई स्थान नहीं होता है, इसलिए उनके बीच कोई भौतिक ट्रांसमिशन माध्यम डालना सम्भव नहीं होता, अतः वायरलेस ट्रांसमिशन का उपयोग किया जाता है। कभी-कभी ऐसे मामलो में भी वायरलेस ट्रांसमिशन का उपयोग किया जाता है, जहां भौतिक केबल डालना संभव नहीं होता या बहुत कठिन होता है, जैसे- पहाड़ो पर, घने जंगलो में, समुन्द्र में, बर्फीले क्षेत्रो में आदि
वायरलेस ट्रांसमिशन में सूचना को विधुतचुंबकीय तरंगो(Electromagnetic Waves) में बदलकर किसी एंटेना द्वारा आकाश में छोड़ दिया जाता है। उन तरंगो को प्राप्तकर्ता के रिसीवर द्वारा पकड़ा जाता है, और उसे मूल सूचना में बदल लिया जाता है, रेडियो और टेलीविजन द्वारा वायरलेस ट्रांसमिशन का ही उपयोग किया जाता है, कई बार आर्थिक रूप से भी वायरलेस ट्रांसमिशन वायर्ड ट्रांसमिशन की तुलना में बहुत सस्ता पड़ता है, और यह सरल भी है इसलिए आजकल धीरे-धीरे वायरलेस ट्रांसमिशन का उपयोग बढ़ता जा रहा है।
वायरलेस उपकरण निम्न दो प्रकार के सिग्नलों द्वारा सूचना का संप्रेषण करते है।
1. रेडियो फ्रीक्वेंसी वेव्स :-
इसप्रकार के तरंगो की फ्रेक्वेंसी 1 से 20 गीगाहर्टज(GHz) होती है, इसका उपयोग वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क द्वारा विभिन्न स्टेशनो के बीच डाटा के ट्रांसमिशन में किया जाता है।
2. इंफ्रारेड वेव्स :-
इस प्रकार की तरंगो की तरंगदैध्य या वेवलेंथ 800 से 900 नैनोमीटर(NM) होती है, इनका उपयोग भी वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क द्वारा किया जाता है, रेडियो वेव फ्रीक्वेंसी वेव की तुलना में इसमें कई विशेषताये और कमिया भी होती है, यह चलायमान इकाईयो(Mobile Units) के लिए उपयुक्त नहीं है।
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